अकादमी की संरचना

अकादमी के संचालन के लिए तीन प्रमुख अंग हैं

  • सामान्य परिषद
  • कार्यकारी परिषद्
  • पहाड़ी भाषा के साहित्य के विकास हेतु स्थाई समिति

सामान्य परिषद

अकादमी संविधान की धारा 7 के अनुसार सामान्य परिषद में 10 सरकारी और 11 गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन हि. प्र. सरकार द्वारा किया जाता है।

सरकरी सदस्यों का मनोनयन

1.मुख्य मंत्री हिमाचल प्रदेशअध्यक्ष
2.प्रभारी मंत्री (भाषा संस्कृति विभाग) हि. प्र.वरिष्ठ उपाध्यक्ष
3.उपाध्यक्ष एवं सभापति कार्यकारी परिषद्उपाध्यक्ष
4.सचिव (वित्त), हिमाचल प्रदेश सरकारसदस्य
5.सचिव (भाषा एवं संस्कृति), हिमाचल प्रदेश , सरकारसदस्य
6.सचिव, (शिक्षा) हिमाचल प्रदेश सरकारसदस्य
7. निदेशक (शिक्षा) हिमाचल प्रदेश सदस्य
8.निदेशक (सूचना एवं जनसम्र्पक) हिमाचल प्रदेशसदस्य
9.निदेशक भाषा एवं संस्कृति हिमाचल प्रदेशसदस्य
10.संग्रहालय अध्यक्ष राज्य संग्रहालय शिमलासदस्य

सामान्य परिषद् के अधिकार एवं कार्य

  1. भाषा साहित्य कला तथा संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत स्वैच्छिक संस्थाओं को मान्यता प्रदान करना।
  2. अकादमी के कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं को निर्धारित करना।
  3. अकादमी के संचालन के लिए नियम आदि बनाना तथा लागू करना।
  4. अकादमी का वार्षिक बजट पारित करना।

कार्यकारी परिषद्

गैर सरकरी सदस्यों का मनोनयन

अकादमी संविधान की धारा 8 के अंतर्गत गैरसरकारी सदस्यों के मनोनयन अधिसूचना संख्या के अनुसार अकादूी की कार्यकारी परिषद् का गठन निम्नानुसार किया गया है

1.प्रभारी मन्त्री, भाषा एवं संस्कृति, हिमाचल प्रदेश सभापति
2.सचिव (भाषा एवं संस्कृति), हिमाचल प्रदेश सरकार उपसभाापति
3.सचिव (वित्त), हिमाचल प्रदश्ष सरकार के प्रतिनिधिसदस्य
4.निदेशक (भाषा एवं संस्कृति), हिमाचल प्रदेश, शिमला-9सदस्य
5.सचिव हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमीसदस्य सचिव
6.श्री के. आर भारती, हमीरपुर (पहाडी लेखक)सदस्य
7.डाॅ. ओम् प्रकाश शर्मा, शिमला (पहाडी लेखक)सदस्य
8.डाॅ. इन्द्र सिंह ठाकुर, मण्डी (पहाडी लेखक)सदस्य
9.डाॅ. रीटा सिंह, कुल्लू (साहित्य)सदस्य
10.श्रीमती भारती कुठियाला, शिमला (निष्पादन कला)सदस्य
11.श्री नंद लाल, प्रो0 कला संकाय हि.प्र. वि. (ललित कला)सदस्य

कार्याकारी परिषद के अधिकार एवं कार्य

  1. आकादमी के प्रशासनिक तथा वित्तीय मामलों का प्रबन्धन।
  2. अकादमी के आय व्यय की स्वीकृति प्रदान करना।
  3. अकादमी के संचालन के लिए कला संस्कृति भाषा से सम्बंधित योजनाएं तैयार करना।
  4. अकादमी के संचालन के लिए रूल्ज आॅफ बिजनेस तैयार करके सरकार को स्वीकृति के लिए भेजना।

पहाड़ी भाषा के साहित्य के विकास हेतु स्थाई समिति

संविधान की धारा 9 के अन्तर्गत पहाड़ी भाषा व इसके साहित्य के विकास हेतु स्थाई समिति के गठन का प्रावधान है। इसमें 5 सदस्य सरकार द्वारा सामान्य परिषद् के सदस्यों में से, जो पहाड़ी (हिमाचली) भाषा व बोलियों का प्रतिनिधित्व करते हों, को मनोनीत किया जाता है।
इनमें से एक सदस्य को संयोजक नियुक्त किया जाता है।
6 सदस्य कार्यकारी परिषद् द्वारा पहाड़ी भाषा और इसकी बोलियों के प्रतिनिधियों में से उनके योगदान के आधार पर मनोनीत किए जाते हैं। सचिव अकादमी सदस्य सचिव के रूप में कार्य करते हैं। इस प्रकार इस परिषद् के कुल 12 सदस्य होते हैं।

पहाड़ी भाषा के प्रतिनिधि

डा. गौतम शर्मा व्यथित

राजय के प्रत्येक जिला का एक प्रतिनिधि

1.डा. ओमप्रकाश शर्मा शिमला
2.डा. इन्द्र ठाकुर मण्डी
3. डा.छेरिग दोर्जे लाहौल स्पिति
4.डा. सूरत ठाकुर कुल्लू
5.डा. रवीन्द्र ठाकुर बिलासपुर
6.श्री अशोक गौतम सोलन
7.श्री के. आर भारती हमीरपुर
8.श्री विद्यासागर नेगी किन्नौर
9.श्री विद्यानंद सरैक सिरमौर
10.श्री शमशेर सिहं राणा ऊना
11.श्री विनोद भावुक कांगडा
12. श्री अशोक र्दद चम्बा

राज्य के भीतर से हिन्दी ,उर्दू , संस्कृत भाषाओं के तीन साहित्यिक प्रतिनिधि:-

1. श्रीमती रीटा सिह हिन्दी
2. श्री जाहिद अबरोल उर्दू
3. आचार्य केशव र्शमा संस्कृत


राज्य से बहार का एक साहित्यिक प्रतिनिधि:-
श्री बलदेव र्शमा अध्यक्ष पुस्तक न्याय भारत सरकार दिल्ली

राज्य के भीतर से निष्पादन कला के दो प्रसिö कलाकार:-

  1. श्री निवास जोशी पंचवटी कनैना भराडी ,शिमला
  2. श्रीमती भारती कुठियाला पी सी चैंबर जोधा निवास ,शिमला

  1. श्री निवास जोशी पंचवटी कनैना भराडी ,शिमला
  2. श्रीमती भारती कुठियाला पी सी चैंबर जोधा निवास ,शिमला

राज्य के बहार का निष्पादन कला का एक प्रसिö कलाकार:-
श्री कमल तिवारी पूर्व अध्यक्ष हरियाणा अकादमी चंडीगढ

राज्य के भीतर से ललित कला के दो प्रसिö कलाकार:-

  1. पद्मश्री विजय र्शमा भूरी सिंह संग्रहालय चंबा हि. प्र.
  2. श्री नंद लाल प्रा. कला संकाय हि. प्र. विश्वविद्यलय, शिमला

राज्य के बाहर से ललित कला का एक प्रसिö कलाकार:-
श्री मदन लाल उपनिदेशक उद्योग विभाग सैक्टर 17 चंडीगढ

स्थाई समिति के अधिकार एवं कार्य

  1. पहाड़ी भाषा एवं साहित्य के विकास के सम्बंध में परामर्ष प्रदान करना
  2. सामान्य परिष्द द्वारा प्रदत्त कार्यो को करना।