पांडुलिपियों का राॅयल्टी पर पुस्तक प्रकाषन योजना नियम

उद्देश्य

  1. अकादमी की कुछ पांडुलिपियों का निजी प्रकाषकों से राॅयल्टी के आधार पर मौलिक, अनूदित एवं संपादित पुस्तकें प्रकाषित करना।
  2. पुस्तकें प्रकाषित करवा कर शोधकर्ताओं और पाठकों को विक्रय के माध्यम से उपलब्ध करवाना।

प्रक्रिया

  1. अकादमी की कार्यकारी परिषद के निर्णयानुसार अकादमी की ‘परियोजना अनुदान योजना नियम‘ के अंतर्गत प्राप्त पांडुलिपियों, अकादमी द्वारा स्वयं तैयार और संपादित की गई पांडुलिपियों और विद्वानों से लिखवाई अथवा संपादित करवाई गई पांडुलिपियों में से कुछ पांडुलिपियों को निजी प्रकाषकों से प्रकाषित करवाया जा सकेगा।
  2. निजी प्रकाषकों से राॅयल्टी पर पुस्तकें प्रकाषित करवाने के लिए सचिव अकादमी और प्रकाषक की आपसी सहमति से पुस्तकों की प्रतियां प्रकाषित करने की संख्या का निर्णय लिया जाएगा।
  3. मूल्य निर्धारण व पुस्तक का आकार-प्रकार भी सचिव अकादमी और प्रकाषक की आपसी सहमति से होगा।
  4. प्रकाषक द्वारा मुद्रण का सारा व्यय करना होगा।
  5. प्रकाषक द्वारा अकादमी को 10 प्रतिषत प्रतियां, लेखक को 10 प्रतियां, अकादमी द्वारा बाहर से संपादित करवाई गई पुस्तकों के संपादक को 5 प्रतियां देय होंगी।
  6. सचिव अकादमी द्वारा अपनी प्रतियों में से संपादित पुस्तकों के रचनाकारों को एक- एक प्रति व स्वविवेक से उस पुस्तक विषेष से जुड़े अधिकारियों व अन्यों को 10 प्रतियों तक मानार्थ दी जा सकेेंगी।
  7. यदि प्रकाषक अकादमी के सहयोग से पुस्तक का लोकार्पण करवाना चाहे, तो मानार्थ दी जाने वाली प्रतियों का निर्णय सचिव अकादमी और प्रकाषक की सहमति से होगा।
  8. अकादमी द्वारा प्रकाषक से अतिरिक्त प्रतियों की खरीद की जाने की स्थिति में मूल्य में छूट देने के लिए सचिव अकादमी तथा प्रकाषक की आपसी सहमति से निर्णय लिया जाएगा।
  9. अकादमी ‘पुस्तक प्रकाषन योजना नियम‘ के अंतर्गत पुस्तकों का विक्रय कर सकेगी।
  10. पुस्तक की दो प्रतियां अकादमी पुस्तकालय में शामिल की जाएंगी।
  11. अनुवाद/रूपांतरण करने और दो वर्ष उपरांत द्वितीय व आगामी संस्करण प्रकाषित करने का अधिकार अकादमी का होगा। पुस्तक को पुनः राॅयल्टी आधार पर प्रकाषित करवाया जा सकता है।
  12. प्रकाषक को पुस्तक के काॅपीराइट पृष्ठ पर यह प्रमाण पत्र प्रकाषित करना होगा – हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा प्रदत्त पांडुलिपि का प्रकाषन।
  13. सचिव अकादमी और प्रकाषक के मध्य लिखित करार किया जाएगा और उस पांडुलिपि पर परिवर्तन करने का अधिकार प्रकाषक को नहीं होगा।
  14. प्रकाषक को पुस्तक तीन मास के भीतर प्रकाषित करनी होगी। विषेष परिस्थितियों में इसकी तीन मास तक अवधि सचिव अकादमी द्वारा बढ़ाई जा सकती है।
  15. किसी भी विवाद की स्थिति में षिमला स्थित न्यायालय का फैसला मान्य होगा।

नियम संषोधन

इन नियमों मे संषोधन का अधिकार कार्यकारी परिषद का होगा।