पुस्तक प्रकाशन योजना नियम

उद्देश्य

  1. अकादमी द्वारा हिन्दी, संस्कृत, पहाड़ी, उर्दू तथा अंग्रेजी भाषाओं में प्रदेष की कला, संस्कृति, भाषा और साहित्य एवं सामाजिक विषयों तथा बाल उपयोगी सामग्री से संबंधित मौलिक, अनूदित एवं संपादित पुस्तकें प्रकाशित करना।
  2. दुर्लभ पांडुलिपियों का मुद्रण।
  3. दुर्लभ पुस्तकों के रिप्रिंट।
  4. अकादमी द्वारा आयोजित संगोष्ठियों, सम्मेलनों में पठित आलेखों, शोध पत्रों को संपादित करके अनिवार्यतानुसार प्रकाशित करना।
  5. अकादमी की परियोजना अनुदान योजना के अन्तर्गत प्राप्त शोध प्रबन्धों को प्रकाशित करना।
  6. विषय की उपयोगिता के आधार पर विद्वानों द्वारा तैयार पांडुलिपियों को प्रकाशित करना।
  7. सांस्कृतिक सर्वेक्षण तथा प्रलेखन योजना के माध्यम से एकत्रित सामग्री को संपादनोपरांत पुस्तक रूप में प्रकाशित करना।
  8. प्रदेश के रचानाकारों की विभिन्न विधाओं की रचनाएं संकलित/संपादित करके प्रकाशित करना।
  9. प्रदेश के अग्रणी साहित्यकारों एवं कलाकारों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर मोनोग्राफ प्रकाशित करना।

योजना संचालन

  1. अकादमी द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों का निर्णय कार्यकारी परिषद द्वारा लिया जाएगा।
  2. पुस्तकों पर सर्वाधिकार अकादमी का होगा।
  3. पुस्तकों का प्रकाषन न हानि न लाभ के सिद्धांत पर किया जाएगा।
    प्रकाशक सचिव अकादमी पुस्तकों के प्रकाशक होंगे।
    प्रकाशन समिति
  4. इस समिति के सदस्य ‘पत्रिका प्रकाशन योजना नियम‘ के अनुसार होंगे।
  5. निजी मुद्रकों से पुस्तकें प्रकाशित करने के लिए निविदाओं की स्वीकृति यही समिति देगी।
  6. खुले बाज़ार से पुस्तकों के पृष्ठ टंकित/कंपोज़्ड करवाने के लिए निविदाओं की स्वीकृति सचिव अकादमी देंगे।
    पुस्तकों का आकार-प्रकार एवं संख्या
  7. सामान्यतः 23‘‘ ग 36/16 और 20‘‘ ग 26/8
  8. सामान्यतः 300 से 500 प्रतियां
  9. विषेष आकार-प्रकार एवं सृजनात्मक ट्रीटमैंट के लिए तथा पुस्तकों की
    अधिक प्रतियां प्रकाषित करने के मद्दे नज़र निम्न समिति द्वारा निर्णय लिया
    जाएगा:-
    1. निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष
      (एवं उप सभापति, अकादमी कार्यकारी परिषद)
    2. कार्यकारी परिषद/सामान्य परिषद का एक सदस्य सदस्य
    3. 3. सचिव अकादमी सदस्य

पुस्तकों का संपादन एवं लेखन

  1. अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का संपादन अकादमी के संबंधित परियोजना अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
  2. विषय विशेष के मद्देनज़र किसी पुस्तक का संपादन अथवा लेखन कार्य किसी योग्य विद्वान को कार्यकारी परिषद के निर्णयानुसार दिया जा सकता है, जो इस कार्य के लिए मानदेय भी तय करेगी।

रचना का मानदेय:

अकादमी पत्रिका योजना के नियमानुसार।

पुस्तकों का मूल्य निर्धारण

पुस्तकों का मूल्य निर्धारण सचिव अकादमी द्वारा किया जाएगा।

पुस्तकों का विक्रय

  1. पुस्तकों का विक्रय अकादमी कार्यालय, गेयटी थिएटर के स्टाल, पुस्तक विक्रेताओं तथा मेलों आदि में आयोजित प्रदर्शनियों के माध्यम से किया जाएगा।
  2. पुस्तकों के विक्रय पर सामान्यतः निम्न प्रकार से छूट दी जाएगी:-
    क 500 रु. तक के विक्रय पर 10 प्रतिशत
    ख 501-1000 रु. तक के विक्रय पर 20 प्रतिशत
    ग 1001 से अधिक के विक्रय पर 40 प्रतिशत
    पुस्तक विक्रेताओं एवं प्रकाषकों को पुस्तकें बेचने के लिए निम्न प्रकार
    से छूट दी जाएगी:-
    क 1-1000 रु. तक 25 प्रतिषत
    ख 1001 से अधिक पर 40 प्रतिशत
  3. पुस्तकों का विक्रय नकद तथा बिल के आधार पर किया जाएगा।
  4. क्रय की गईं पुस्तकों के प्रेषण पर होने वाला डाक एवं परिवहन व्यय अकादमी द्वारा वहन किया जाएगा।

मानार्थ वितरण

  1. महामहिम राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश
  2. माननीय मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष अकादमी, प्रभारी मंत्री, उपाध्यक्ष अकादमी, सचिव (भाषा-संस्कृति), निदेशक एवं उप सभापति कार्यकारी परिषद और सचिव (वित्त) को एक-एक प्रति।
  3. अकादमी की पुस्तकों में शामिल रचना के लेखकों, कलाकारों एवं संबंधित पुस्तकों से सृजनात्मक कार्य हेतु जुड़े अकादमी के अधिकारियों को एक-एक प्रति।
  4. पुस्तक के लेखक को 20 प्रतियां।
  5. अकादमी की पुस्तक का सम्पादन करने पर बाहर के संपादक को 5 प्रतियां।
  6. सचिव अकादमी द्वारा स्वविवेक से 10 प्रतियां।
  7. लोकार्पण के अवसर पर विषिष्ट अतिथियों एवं गण्य-मान्य व्यक्तियों के लिए 10 प्रतियां।
  8. अकादमी पुस्तकालय के लिए दो प्रतियां

नियम संषोधन

इन नियमों में संषोधन का अधिकार कार्यकारी परिषद का होगा।