पुस्तक प्रकाषनार्थ वित्तीय अनुदान योजना नियम

उद्देश्य

  1. कला संस्कृति, भाषा और साहित्य के क्षेत्र में हिमाचली लेखकों को हिन्दी, पहाड़ी, संस्कृत, अंग्रेजी तथा उर्दू भाषाओं में उनकी अप्रकाषित मौलिक एवं अनूदित पांडुलिपियों को प्रकाषनार्थ वित्तीय अनुदान प्रदान करना।
  2. हिमाचल से बाहर के विद्वानों को हिमाचल प्रदेष की पारंपरिक लोक कला, लोक संस्कृति, पहाड़ी भाषा एवं लोक साहित्य से संबंधित विषयों पर अप्रकाषित मौलिक एवं अनूदित पांडुलिपियों को प्रकाषनार्थ वित्तीयानुदान प्रदान करना।

पात्रता

इस योजना के अंतर्गत किसी भी समय पांडुलिपि की दो हस्तलिखित एवं टंकित प्रतिलिपियां विचारार्थ दी जा सकेंगी।

प्रक्रिया

  1. पांडुलिपि प्राप्त होने पर सचिव अकादमी द्वारा उसका आकलन करके पांडुलिपि का कोई आधार न होने और बिल्कुल सामान्य होने पर उसे वापिस लेखक को भेजा जा सकेगा, अन्यथा विषय के एक विषेषज्ञ अथवा विद्वान् से समीक्षा करवाई जाएगी। समीक्षक की रिपोर्ट को निर्णयार्थ कार्यकारी परिषद में प्रस्तुत किया जाएगा।
  2. पांडुलिपि के आकार को देखते हुए समीक्षकों को अधिकतम 1000 रुपए तक का मानदेय सचिव अकादमी द्वारा स्वीकृत किया जाएगा।
  3. किसी भी पांडुलिपि को स्वीकृत/अस्वीकृत करने का अधिकार कार्यकारी परिषद को होगा। कार्यकारी परिषद द्वारा अधिकतम 15000/- की राषि तक का अनुदान स्वीकृत किया जा सकेगा।
  4. अनुदान 50-50 प्रतिषत के अंतर्गत दो किष्तों में देय होगा। प्रथम अग्रिम किष्त तथा दूसरी किष्त पुस्तक प्रकाषनोपरांत।
  5. स्वीकृति पत्र जारी होने के छः मास के भीतर पुस्तक प्रकाषित करनी होगी। विषेष परिस्थितियों में सचिव अकादमी द्वारा यह अवधि बढ़़ाई जा सकेगी।
  6. लेखक को पुस्तक के काॅपीराइट पृष्ठ पर ‘हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा प्रदत्त वित्तीय अनुदान के अंतर्गत प्रकाषित‘ यह प्रमाण पत्र छापना होगा।
  7. पुस्तक प्रकाषित होने पर लेखक को 5 प्रतियां निःषुल्क अकादमी कार्यालय में देनी होगी। ये प्रतियां बाद में अकादमी पुस्तकालय के रिकार्ड में दर्ज की जाएंगी।
  8. पुस्तक का प्रकाषन स्वीकृत पांडुलिपि के अनुसार और स्तरीय होना चाहिए। इस योजना में अनुदान प्राप्त करने वाली पांडुलिपि की प्रकाषित पुस्तक ‘पुस्तक थोक खरीद योजना‘ में विचारार्थ शामिल नहीं की जा सकेगी।

नियमों में संषोधन

इन नियमों में संषोधन करने का अधिकार कार्यकारी परिषद का होगा।