सांस्कृतिक प्रलेखन योजना नियम

उद्देश्य एवं प्रयोजन

  1. हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक कलाओं, लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण एवं संवर्धन।
  2. इसके अंतर्गत प्रदेष के मेले-त्योहारों, उत्सवों, अनुष्ठानों इत्यादि का छायांकन एवं आॅडियो- वीडियो माध्यमों से प्रलेखन।
  3. प्रदेष की पारंपरिक, जनजातीय एवं लोक निष्पादन तथा ललित कलाओं का छायांकन एवं आॅडियो-वीडियो माध्यम से प्रलेखन।
  4. आॅडियो-विडियो सामग्री की लैब स्थापित कर इस सामग्री को शोधकर्ताओं को उपलब्ध करवाना।
  5. छायाचित्रों का संग्रह करना।
  6. उक्त एकत्रित सामग्री का अकादमी द्वारा स्वयं अथवा विषेषज्ञों से आलेख तैयार करवा कर उचित संपादनोपरांत अनिवार्यतानुसार प्रकाषन करना।

मानदेय एवं अन्य व्यवस्था

  1. ललित एवं निष्पादन कला आयोजन नियम की मद संख्या 4 (1 व 3), साहित्यिक आयोजन नियम की मद संख्या 4(1 से 5) तथा पत्रिका प्रकाषन योजना नियम की मद संख्या 9 (2) के अंतर्गत।
  2. प्रलेखित सामग्री को प्रकाषन की दृष्टि से अकादमी के बाहर के विद्वान से आलेखित करवाने के संदर्भ में लेखक अथवा संपादक को सामग्री की साॅफ़्ट प्रति देने के साथ-साथ ‘पुस्तक प्रकाषन योजना नियम‘ की मद 7(2) के अंतर्गत मानदेय तय किया जाएगा। साॅफ़्ट प्रति यथा सी.डी., डी.वी.डी. आदि की व्यवस्था लेखक अथवा संपादक के पास न होने पर उसकी व्यवस्था किसी स्थान पर करवाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में उन्हें यात्रा एवं दैनिक भत्ता और आवास व्यवस्था की सुविधाएं ‘साहित्यिक आयोजन नियम‘ के क्रमांक 4(1 से 5) तक दी जाएंगी।

विविध नियम

यदि कोई शोधकर्ता उक्त प्रलेखित सामग्री को अपने शोध कार्य करने के लिए मांगता है, तो उससे लिखित लिया जाएगा कि वह उसका व्यावसायिक प्रयोग नहीं करेगा और उस सामग्री को सी.डी./डी.वी.डी./पैन ड्राइव आदि यथा संभव माध्यम से दी जा सकेगी, जिसका व्यय शोधकर्ता का होगा और उसे अपने शोध कार्य में अकादमी से ली गई इस सामग्री का यथोचित पृष्ठ अथवा संदर्भिका में वर्णन करना होगा।

नियमों में संषोधन

इन नियमों में संषोधन करने का अधिकार कार्यकारी परिषद का होगा।