साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रकाशनार्थ वित्तीय अनुदान योजना नियम

उद्देश्य

  1. हिमाचल प्रदेश की हिंदी, पहाड़ी, उर्दू, संस्कृत एवं अंग्रेजी पंजीकृत पत्रिकाओं को कला, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में प्रकाषनार्थ वित्तीय अनुदान प्रदान करना।
  2. प्रदेश के बाहर रह रहे हिमाचली लोगांे द्वारा कला, संस्कृति, भाषा और साहित्य के क्षेत्र में प्रकाषित पंजीकृत पत्रिकाओं को प्रकाषनार्थ वित्तीय अनुदान प्रदान करना।

पात्रता:

  1. पत्रिकाएं कला, संस्कृति, भाषा और साहित्य पर केन्द्रित होनी चाहिएं।
  2. उन्हीं पत्रिकाओं को अनुदान दिया जाएगा जो कम-से-कम विगत 3 वर्षों से प्रकाषित हो रही हैं।
  3. आवेदक को आवेदन पत्र के साथ गत 3 वर्षों में प्रथम एवं अंतिम प्रकाषित अंकों की एक-एक प्रति संलग्न करनी होंगी।
  4. पत्रिका के कम से कम 48 पृष्ठ हों।
  5. पत्रिका का आकार-प्रकार, साज सज्जा तथा मुद्रण स्तरीय होना चाहिए।
  6. साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक पत्रिकाओं को अनुदान देय होगा।
  7. पत्रिका को अनुदान एक वर्ष में एक बार तथा एक अंक के लिए दिया जा सकेगा।

वित्तीय अनुदान राशि

  1. वित्तीय अनुदान राशि सचिव अकादमी द्वारा स्वविवेक से पत्रिका के लिए उसकी प्रकाषन अवधि पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, वार्षिक आदि को देखकर अधिकतम रुपए 15000/- तक स्वीकृत की जा सकेगी।
  2. अनुदान राशि की अदायगी पत्रिका का अंक प्रकाषित होने तथा 4 प्रतियां निःषुल्क अकादमी कार्यालय में प्राप्त होने के बाद की जाएगी।

विविध

  1. हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा साहित्यिक पत्र.पत्रिका प्रकाषनार्थ वित्तीय अनुदान के अंतर्गत प्रकाषित‘ यह प्रमाण पत्र पत्रिका के काॅपीराइट पृष्ठ पर छापना अनिवार्य होगा।
  2. पत्रिका का प्रकाषन स्तरीय न होने तथा निर्धारित अंक एवं रूपरेखा के अनुसार न छापे जाने की स्थिति में सचिव अकादमी को अनुदान रद्द करने का अधिकार होगा।
  3. प्रकाषित पत्रिका की एक प्रति बिल के साथ, एक कार्यालय प्रति तथा दो प्रतियां अनुदान जारी करने के उपरांत पुस्तकालय में दर्ज की जाएंगी।

नियम संषोधन

इन नियमों में संषोधन का अधिकार कार्यकारी परिषद का होगा।